इधर आँखों में आँसू तुम तसल्ली बन के आते हो
जला है ख़िर्मने दिल कैसे जान जाते हो
मुझे होने लगी क्योंकर मेरे अंजाम की परवा
मैंने थामा तुम्हें और तुम मुझे चलना सिखाते हो
बना लूँ किस तरह अपना तुम्हें मेरी कसम कह दो
जो ख़ुद ही तुमपे शैदा है उसे ही आजमाते हो
ये बस्ती मुझसे कहती है तुम्हें मुझसे मोहब्बत है
भरी महफ़िल में लेकिन तुम मुझी को क्यूँ सताते हो
जला है ख़िर्मने दिल कैसे जान जाते हो
मुझे होने लगी क्योंकर मेरे अंजाम की परवा
मैंने थामा तुम्हें और तुम मुझे चलना सिखाते हो
बना लूँ किस तरह अपना तुम्हें मेरी कसम कह दो
जो ख़ुद ही तुमपे शैदा है उसे ही आजमाते हो
ये बस्ती मुझसे कहती है तुम्हें मुझसे मोहब्बत है
भरी महफ़िल में लेकिन तुम मुझी को क्यूँ सताते हो
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