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बज़्म में

कौन था ऐसा जो ना शामिल तुम्हारी बज़्म में 
लुत्फ़े तनहाई मुझे हासिल तुम्हारी बज़्म में
वो लड़कपन था गुज़र जाना ही था उसको कभी 
अब हुए जीअक्ल हम काबिल तुम्हारी बज़्म में
एक तोहमत ने किसी की कर दिया तनहा मुझे 
देख कर रौनक हुए दाख़िल तुम्हारी बज़्म में
जाने क्या जादूगरी थी अनकही हर बात में
बिन पिए हम हो गए गाफ़िल तुम्हारी बज़्म में

ख़ाक हम होते रहे सुनकर फ़साने इश्क के
एक से बढ़कर हैं एक क़ातिल तुम्हारी बज़्म में
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30 aug.2013
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