मैंने थोड़े फूल खिलाये एक गुलशन आबाद किया
दिल की ज़मीं पर नाम तुम्हारा लिखकर तुमको याद किया
दिल की ज़मीं पर नाम तुम्हारा लिखकर तुमको याद किया
मुझको ग़वारा कब था साहिब रस्मे उदूं से डर जाना
अपनी सरहद पार करी और खुलकर तुमको याद किया
अपनी सरहद पार करी और खुलकर तुमको याद किया
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