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दिले बेताब बतला

ऐ दिले बेताब बतला तेरी ख़ातिर क्या करें
आसमाँ से तारे चुन लें चाँद को देखा करें
वो मेरे नज़दीक आकर भी पराया ही रहा
जिसको पाया ही नहीं खोने का ग़म हम क्या करें
ओढ़ ले ख़ामोशियाँ जो बस ज़रा सी बात में
उससे हम फिर क्या कहें कैसे कोई शिक़वा करें
सारे दिन के बाद आई शाम ये दीदार की
प्यार की बातें करे हम वक़्त क्यों ज़ाया करें
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