अब क्यों किया
तब क्यों नहीं किया था
बड़ा बेमानी सा प्रश्न है
क्योंकि कभी उम्र
कभी रिश्ते और
कभी हालात
इजाज़त नहीं देते
और कभी कभी
हिम्मत जुटाते
उम्र गुज़र जाती है
बावज़ूद इसके
कभी कभी मेरे दिल में
ख़याल आता है
तब नहीं तो अब सही
हर्ज़ क्या है अगर
रस्मे दुनिया भी हो
मौका भी हो
दस्तूर भी हो :)
============
तब क्यों नहीं किया था
बड़ा बेमानी सा प्रश्न है
क्योंकि कभी उम्र
कभी रिश्ते और
कभी हालात
इजाज़त नहीं देते
और कभी कभी
हिम्मत जुटाते
उम्र गुज़र जाती है
बावज़ूद इसके
कभी कभी मेरे दिल में
ख़याल आता है
तब नहीं तो अब सही
हर्ज़ क्या है अगर
रस्मे दुनिया भी हो
मौका भी हो
दस्तूर भी हो :)
============
No comments:
Post a Comment