ये भीगी सी हलकी सर्द सुबह
पर कुछ कमी सी है
काश !! तुम होते
नज़र के सामने तुम
और नज़र चुराती मैं
दिल को क़रार
बेशुमार
एक अल्हड़ उत्सुकता
जागती है
मन के किसी कोने में
अगर तुम होते
तो क्या करते
क्या कहते
तुम्हें नहीं पता
मैं सोती ही इस ख़ातिर हूँ
कि काश !!
कोई ख़्वाब आये
और ख़्वाब में
तुम आओ
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