उसकी बातें
हैं धूप के जैसी
हैं धूप के जैसी
अपनी मरज़ी से
आता - जाता है
आता - जाता है
ये न पूछो
कि क्या कहा उसने
कि क्या कहा उसने
वो था बस
बाक़ी भूल जाता है
बाक़ी भूल जाता है
शाख़े गुल
क्यों न मौज में झूमे
क्यों न मौज में झूमे
जब कभी
चोर सा कोई भँवरा
चोर सा कोई भँवरा
जाते - जाते भी
गुल के अधरों पर
गुल के अधरों पर
एक मुस्कान
छोड़ जाता है
छोड़ जाता है
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