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तुम्हारी सूरत

तुम्हारी सूरत हो सामने तो भूल जाता हरेक गिला है 
कभी तो महफ़िल कभी हो तनहा हमारा अपना ये मशग़ला है 
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(मशग़ला = दिल-बहलाव)

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