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रुत फिर से आयेगी

कभी लेते थे हम साँसें महकती उन हवाओं में 
वो भूली ख़ुशबुएँ अब भी महकती उन हवाओं में 
बहारे गुल थे तुम तुमको बहारों साथ जाना था 
वही रुत फिर से आयेगी महकती उन हवाओं में 

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