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तुम आओगे

चले आएँगे हम जानां जहाँ महफ़िल सजाओगे
अदब की उन हवाओं में कहाँ ख़ुश्बू छुपाओगे
चले हो जो सफ़र में तो ज़हन में इक पता रखना
बहुत सी मंज़िलें होंगी तो किस रस्ते पे जाओगे
छुपाते हैं मुहब्बत को जो हम तुमको जता दें तो
ज़रा सा मुस्कुरा दोगे बहुत फिर तुम सताओगे
तुम्हारा ख़्वाब आँखों में था सोये दिन चढ़े तक हम
न जाने क्या समाँ होगा बज़ाहिर जो तुम आओगे
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