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एक बूँद

एक बूँद नूर ....
और ज़रा सी शोख़ी
पहाडी नदी से लेकर 
मोहिनी बन जाती है
खूबियाँ तो ख़ुदा ने दी हैं
सजती वो अपने गुणों से है
वेद पढ़ना .......
वर्जित हो भले ही
शब्द से कब वो बात करती है
कहना तो उसको अपने दिल से है

सीता , अहिल्या .....
विद्योत्तमा ......
छल से जीत जाता है कोई
हारती तो बस .... वो प्यार से है
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23 aug 2013
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