वो गुलमोहर
जो ग्रीष्म से नहीं होता परेशान
हो जाता है बहुत - बहुत सुन्दर
आकाश की आग जज़्ब करके
हो जाता है अधिक सुर्ख
हवाओं का पतझड़ साझा करके
जाने कहाँ से ले आता है वसंत
जब उसके पास एक भी पत्ता नहीं होता
लड़ा होता है प्यारे फूलों से
चिलचिलाती धुप में खडा
कभी अभावों का रोना नहीं रोता
मेरे आँगन का गुलमोहर
पिता की मानिंद
तभी तो कभी - कभी
पिता को भी
आग जज़्ब करने के लिए
होना पड़ता है सख्त
गुलमोहर की मानिंद
ताकि बेख़ौफ़ रहें
उसके बच्चे और उनकी अम्मा ।।
जो ग्रीष्म से नहीं होता परेशान
हो जाता है बहुत - बहुत सुन्दर
आकाश की आग जज़्ब करके
हो जाता है अधिक सुर्ख
हवाओं का पतझड़ साझा करके
जाने कहाँ से ले आता है वसंत
जब उसके पास एक भी पत्ता नहीं होता
लड़ा होता है प्यारे फूलों से
चिलचिलाती धुप में खडा
कभी अभावों का रोना नहीं रोता
मेरे आँगन का गुलमोहर
पिता की मानिंद
तभी तो कभी - कभी
पिता को भी
आग जज़्ब करने के लिए
होना पड़ता है सख्त
गुलमोहर की मानिंद
ताकि बेख़ौफ़ रहें
उसके बच्चे और उनकी अम्मा ।।
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