दुआ में हाथ उठे
और .....
तुम्हारा चेहरा नज़र आया
मैं ख़ुद को भूल गयी और माँग ली
कुछ दुआएँ तुम्हारे लिए ...
मैं ....
जो तुम्हारी कोई नहीं
पर तुम मत कहना ...
कुछ हकीकतों पर
यकीन नहीं मुझे
मुझे मेरे ख़याल पसंद हैं
मुझे मेरे वहम पर यकीन है
तुम .. बेख़ौफ़ मिलो मुझसे
ग़ैरों के खोने का डर नहीं होता
मैं क्या सोचती हूँ
वो ... तुम जाने दो ...
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14th oct.2013
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और .....
तुम्हारा चेहरा नज़र आया
मैं ख़ुद को भूल गयी और माँग ली
कुछ दुआएँ तुम्हारे लिए ...
मैं ....
जो तुम्हारी कोई नहीं
पर तुम मत कहना ...
कुछ हकीकतों पर
यकीन नहीं मुझे
मुझे मेरे ख़याल पसंद हैं
मुझे मेरे वहम पर यकीन है
तुम .. बेख़ौफ़ मिलो मुझसे
ग़ैरों के खोने का डर नहीं होता
मैं क्या सोचती हूँ
वो ... तुम जाने दो ...
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14th oct.2013
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