एक दिन
मैंने हथेली
जब तुम्हारी थाम ली थी
मैंने हथेली
जब तुम्हारी थाम ली थी
और तुम
तब हँस पड़े थे
ये कहा था
तब हँस पड़े थे
ये कहा था
छोड़ जाता हूँ मैं इसकी छाप
और मैं
भाव में भर तर गले से
भाव में भर तर गले से
इतना ही बस बोल पायी
एक दिन तो और रुकते
एक दिन तो और रुकते
और तुमने
ये कहा तुम संग चलो
ये कहा तुम संग चलो
एक वो दिन था
कि तबसे आज तक
कि तबसे आज तक
याद करती हूँ
कि उस दिन
कि उस दिन
हो नहीं सकती थी
इससे बात प्यारी
इससे बात प्यारी
पथ निहारूँ , राह देखूँ , बाट जोहूँ
कर रही पल - पल प्रतीक्षा
मैं तुम्हारी
कर रही पल - पल प्रतीक्षा
मैं तुम्हारी
तुम कहो कैसे रहूँ
मैं दूर होकर
मैं दूर होकर
ओ भ्रमर मैं तो हूँ बस
गुंजन तुम्हारी
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गुंजन तुम्हारी
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