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माहिए

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सावन की सौगातें 
मन को चुभती हैं 
तेरी मीठी यादें
ओ परदेसी बालम
दिल में तू ही तू
हर सू तेरा आलम
इक नाता जोड़ गया
लेकर दिल मेरा
तू यादें छोड़ गया
आ जाओ मिल जाओ
हसरत है दिल में
इक बार नज़र आओ
पलकों पर बैठाऊँ
तेरी ख़ातिर मैं
क्या क्या ना कर जाऊँ
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