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कैसे मनाऊँ

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तुम जब 
ख़फ़ा नहीं थे 
अपनी सारी बातें 
मुझसे कहते थे
अब जो तुम मुझसे ख़फ़ा हो
सोचती हूँ
दम घुटता होगा तुम्हारा
किसके पास वक़्त है
सुनने का
उन बातों को
जिन्हे मैंने सुना
ब्रह्म वाक्य की तरह
कोई सुन भी ले तो
क्या कहता होगा कि
सब ठीक हो जाएगा
जो कोई कह भी दे
तो क्या - - -
तुम तक पहुँचती होगी
उसकी मुस्कान
कुछ इस तरह
कि होठों पर तुम्हारे
थिरक जाए
एक - - -
जाने क्या तो कहते थे
तुम उस बिजली को
तुम - - - तुम ख़ुश हो ना
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