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प्रतीक्षा

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सूरज पर पहरे बैठा दो 
रात को ना जाने दूँगी 
जब तक ना घर आये सजनवा 
सौतन को ताने दूँगी
बिजुरी चमके बदरा गरजे
कोयल रात में कूक उठी
याद आयी इक बात पुरानी
भरे नयना दिल हूक उठी
नैनन में छब तैर गयी जब
नीर न बह जाने दूँगी
जब तक ना घर आये सजनवा
सौतन को ताने दूँगी
साँवल रात में दीप जला के
आस लगाए बैठी हूँ
बारिश की लड़ियों से
वंदनवार सजाये बैठी हूँ
ओ कागा पैग़ाम सुना जा
मोतियन मैं दाने दूँगी
जब तक ना घर आये सजनवा
सौतन को ताने दूँगी
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