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भूली - बिसरी

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किसी की टैग की हुई कविता 
आज दुबारा दस्तक दे गयी 
- - - कमेंट न करूँ तो क्यूँ - - 
- - जो करूँ तो क्या - - -
तुम्हें याद हो कि न याद हो - -
दुनिया बहुत छोटी है ना - -
कोई टैग की हुई कविता
आज दुबारा दस्तक दे गयी
उस पर होते हुए कमेंट देखती रही
और महसूस करती रही
अपने ही घर में
कोई कैसे होता है अजनबी
ज़रा देर में गुज़र जाएगी ये कविता
और एक टीस दे जाएगी
तुम्हारी तरह
जी करता है - - -
पकड़ के हाथ रोक लूँ
पूछ लूँ कविता से तुम्हारा हाल
ज़रा सा जी लूँ - - -
ज़रा सा छू लूँ शब्दों को - - -
और ज़रा सा तुम्हें भी - - -
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