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मन की बात

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जब तुम मेरे करीब आते हो 
वो सबसे हसीन लम्हा होता है 
मेरी ज़िंदगी का 
ये और बात है कि जाते हुए
मैं तुम्हें देखती रह जाती हूँ
नहीं कह पाती हाथ पकड़कर
कि मत जाओ
जब तुम मेरे करीब आते हो
और कुछ प्यार
कुछ मनुहार और
कुछ अधिकार जताते हो
एक मुस्कान ख़ुद ब ख़ुद
मेरे होठों और
तुम्हारी आँखों में
तैर जाती है
ये और बात है कि देख लेती हूँ
झुकी आँखों से भी रुख़े रोशन का नूर
जब तुम मेरे करीब आते हो
क्या पाते हो मुझमें
बेख़ुदी में खोई
भरी - भरी
ओस की बूँद की मानिंद मैं
और एक नूर की बूँद तुम
ज़रा सा भीग जाते हो तुम
ज़रा सी सतरंगी हो जाती हूँ मैं
ये और बात है कि नहीं पता थी
हमें भी ये बात
ये और बात है कि क्या फ़र्क़ पड़ता है
ज़िंदगी यूँ ही चलती रहे
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