वो अल्हड़ सी लड़की , जो हर त्योहार एन्जॉय करती थी - - - बरसों बाद - - - आज याद करती है अपने पुराने दिन :)
गम्हइयाँ मेला ठेला जाए
चूंदी झंडी सी फहराये
जूता चर्र मर्र चर्राये
लाई लप्पर लप्पर खाए
गम्हइयाँ [देहाती ] मेला ठेला जाए
चूंदी झंडी सी फहराये
जूता चर्र मर्र चर्राये
लाई लप्पर लप्पर खाए
गम्हइयाँ [देहाती ] मेला ठेला जाए
तिल स्नान , तिल दान और तिल खान - - - दादी ने कहा तो सुन लिया - - - पर पापा हर बात का महत्व भी साथ में बताते जाते कि ऐसा है तो क्यों है
माँ ने कहा पहले नहाओ - - -कुएँ का ताज़ा पानी
माँ ने कहा पहले नहाओ - - -कुएँ का ताज़ा पानी
फिर गरम खिचड़ी के साथ - - - दादी कहतीं - - - खिचड़ी के चार यार - - - दही पापड़ घी अचार
- - - - जैसे - तैसे खाके भागते थे पापा के साथ मेले में - - -
- - - - जैसे - तैसे खाके भागते थे पापा के साथ मेले में - - -
पापा हर बच्चे की पॉकेट में पते की चिट रख देते थे कि खो जाओ तो पुलिस अंकल को दिखाकर घर आ जाना - - - :)
वैसे भी उस छोटे से मेले में आधे से ज्यादा लोग पापा के परिचित होते - - -
वैसे भी उस छोटे से मेले में आधे से ज्यादा लोग पापा के परिचित होते - - -
खटोले वाला झूला - - - :) एक बार - - दो बार - - - तीन बार - - - पापा और :) - - - और पापा झूले वाले को इशारा कर देते झुला दो :)
कुछ साल बाद - - -
पापा - - - मेरे कॉलेज की सहेलियाँ जा रही हैं - - - उनके साथ मेला जाऊँ - - - और अनुमति मिल गयी :)
कुछ नए तजुर्बे - - -
कुछ ज्यादा मस्ती - - -
कुछ नए तजुर्बे - - -
कुछ ज्यादा मस्ती - - -
और अब - - - मेरे बच्चे अपने दोस्तों के साथ अकेले जाने लगे - - -
अम्माजी की तरह कोई कहावत कह दूँ तो शिशिर फ़ौरन कहेंगे - - - - तुम शहडोलिये लोगों की कोई बात कहावत के बिना पूरी ही नहीं होती :)
अम्माजी की तरह कोई कहावत कह दूँ तो शिशिर फ़ौरन कहेंगे - - - - तुम शहडोलिये लोगों की कोई बात कहावत के बिना पूरी ही नहीं होती :)
No comments:
Post a Comment