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गुज़ारिश है मेरी तुमसे

June 17, 2013 · 
मेरे एहबाब गुज़ारिश है मेरी तुमसे 
दौलते चाँद को दुनिया की नज़र कर देना
मुझे नूर की ख़्वाहिश जो रुख़ पर तेरे 
मेरी रातों के अँधेरों में सहर भर देना
तुम्हें कुछ इल्म भी है
कैसा असर करती है
जब तेरी बेबाक़ ज़बाँ
शोख़ के सर चढ़ती है
हुस्न और इश्क़ के
नग़मे जो सुनाओ उस पल
मेरे चेहरे की तरफ़ नज़रें घुमाया न करो
नहीं आते हैं तरीके कि बचूँ कैसे
मेरी ख़ातिर तुम
जाल बिछाया न करो
मेरे एहबाब गुज़ारिश है मेरी तुमसे
जान ले लोगे मेरी
रोज़ यूँ आया न करो
एक चिड़िया जो ख़ुश बैठी है
एक पिंजरे में
उसके पंखों को परवाज़
दिखाया न करो
मेरे महबूब गुज़ारिश है मेरी तुमसे 

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