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कहाँ ज़ुल्फ़ें सुखाऊँ मैं

ये मौसम बारिशों का है कहाँ ज़ुल्फ़ें सुखाऊँ मैं 
जो बरसे तो मुसीबत है न बरसे तो क़यामत है
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