मैंने देखा
कोई अनगढ़ सा लड़का
कोई अनगढ़ सा लड़का
जिसकी ज़िद थी
मेरा दोस्त बनने की
मेरा दोस्त बनने की
हँस दी मैं
और भूल गई
और भूल गई
पर वो तो
हर चौराहे पर
दिखता मस्तियाता हुआ
हर चौराहे पर
दिखता मस्तियाता हुआ
मुझे क्या ???
पर एक रोज़
मिला दोस्त के घर
पर एक रोज़
मिला दोस्त के घर
अब टालना मुश्किल था
जाते - जाते कह गया
जाते - जाते कह गया
मेरी बद्तमीज़ियों से
मेरा आकलन मत करना गुंजन
मेरा आकलन मत करना गुंजन
और जाने क्यों मैं संजीदा हो गई
उसकी बात छू गई मुझे
उसकी बात छू गई मुझे
अब मुझे उसकी बातों की आदत हो गई
सच कहूँ तो उसकी आदत हो गई
सच कहूँ तो उसकी आदत हो गई
उसकी चौकस नज़र
एक बार में सारा जायज़ा ले लेती
एक बार में सारा जायज़ा ले लेती
हर बात की जड़ तक पहुँचना
बायें हाथ का खेल था
बायें हाथ का खेल था
अब भी मैं उसकी दिलेरी
देखती रह जाती हूँ
देखती रह जाती हूँ
जब वो साफ़ - साफ़
अपनी ख़ूबियाँ , ख़ामियाँ कह देता है
और दूसरे की भी
अपनी ख़ूबियाँ , ख़ामियाँ कह देता है
और दूसरे की भी
जब लिखता है तो
मोती बिखेर देता है
मोती बिखेर देता है
और उदास होने पर
मोती सा बिखर जाता है
मोती सा बिखर जाता है
जब गाता है तो दुनिया भुला देता है
और जब उसे सुनती हूँ
तो खुद को भूल जाती हूँ
और जब उसे सुनती हूँ
तो खुद को भूल जाती हूँ
बहुत गहरा समुन्दर सा
चेहरा पढ़ना आसान नहीं
चेहरा पढ़ना आसान नहीं
पर वो चाहे तो उसे पढ़ना
ज़रा भी मुश्किल नहीं
ज़रा भी मुश्किल नहीं
उसे याद नहीं करना पड़ता
वो याद आता है
वो याद आता है
जब तब मुझसे झगड़ता है
जाने क्यों इतना अकड़ता है
जाने क्यों इतना अकड़ता है
अपनी बातें मनवाने को
मेरे पीछे पड़ता है
मेरे पीछे पड़ता है
कुछ शोख़ी कुछ भोलापन
बचपन ठहर गया जैसे
बचपन ठहर गया जैसे
मैं हार के जीता करती हूँ
वो जीत के ख़ुश हो जाता है
वो जीत के ख़ुश हो जाता है
अक्सर
कर्ण का ज़िक्र करता है
और जाने क्यों ?????
कर्ण का ज़िक्र करता है
और जाने क्यों ?????
मुझे कुछ - कुछ
कर्ण जैसा लगता है
===============
कर्ण जैसा लगता है
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