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गगरिया

चटक गगरिया ले , सावनी चुनरिया में 
घुँघटा उड़ाती गोरी , पनघट अइहे 
पानी भी पिलाएगी वो , प्यास भी बढ़ाएगी वो 
बावरा बनाएगी तू , समझ न पइहे 
कभी मुसकाये गोरी , अँखियाँ मिलाये छोरी 
शोख़ियाँ शरम भरी , जान लेके जइहे
धीरे - धीरे चलो सखी , हौले - हौले चलो सखी
बजेगी पायलिया तो , सासू जग जइहे

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