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ख़्वाब

रात भर ख़्वाब में मुझको सताने वाले 
तू बता तेरे ख़्वाब में मैं थी कि नहीं 
नर्म दस्तक से छेड़ कर मन को 
मय पिलाई मुझे वो ख़ुद भी पी कि नहीं
वो रहगुज़र जिससे तू चलकर आया 
मधुर मलय समीर तू बनकर आया
वो शज़र अब दहक रहे होंगे
उस फ़ज़ा में सभी बहक रहे होंगे
टूटी नींद के अफ़साने ऋतुराज बुने
हँसकर फूल पलाश किसी ने आज चुने
तुम कहते आ जाओ मौसम प्यार भरा
मैं कहती रुक जाओ सनम रुक जाओ ज़रा 

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