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अजनबी

ओह तुम !!
अनदेखे अनजाने अजनबी
मैंने तुम्हें नहीं देखा
पर महसूस किया है
अक्सर तुम बरस जाते हो
और मैं भीग जाती हूँ
तुम ओस की फुहार हो
या तेज़ बौछार
मैं तुम्हें नहीं जानती
पर एक दूरी पर
हमेशा साथ पाया है
तुम चाँद हो
या मेरी परछाईं
तुम्हारी बातें
अजनबी तो नहीं
मैंने तुम्हें देखा भी नहीं
पर यक़ीन है मुझे
कि पुरुष हो तुम
कि तुमसे बात करते हुए
कई रिश्तों में जीते हुए
[ कार्येषु मंत्री - - - ]
मुझे अहसास होता है
कि मैं औरत हूँ
और ये अहसास
एक औरत के लिए
बहुत बड़ी बात है
तुम्हें मैंने देख लिया
जान लिया
पहचान लिया
अंतर्मन से
तुम - - -
तुम मुझे क़ुबूल हो
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