गुनगुनी नेह भरी धूप में
जब ठण्ड भी नर्म सी है
जब ठण्ड भी नर्म सी है
सरकते मौसम के साथ
जब ख़िज़ाँ में झरते हुए पत्ते
अंतिम साँस लेते हैं
जब ख़िज़ाँ में झरते हुए पत्ते
अंतिम साँस लेते हैं
बहार ने रुख किया इधर
गुलमोहर की टहनी
लदी है सुर्ख़ फूलों से
लदी है सुर्ख़ फूलों से
मेहमान परिंदे आने को हैं
मेरे देश में
मेरे देश में
किसी झील के किनारे
गूँज उठेंगे कलरव से
गूँज उठेंगे कलरव से
और मैं
बड़े प्यार से
उनसे पूछूँगी
बड़े प्यार से
उनसे पूछूँगी
ओ परदेसी
तुम्हारा घर कहाँ है
तुम्हारा घर कहाँ है
हालाँकि
उन्हें जाना ही है
कुछ रोज़ बाद
उन्हें जाना ही है
कुछ रोज़ बाद
पर जो मेरा प्यार
उनके साथ होगा
उनके साथ होगा
तो विदा में
एक ख़्वाहिश भी साथ होगी
दुबारा आने की
एक ख़्वाहिश भी साथ होगी
दुबारा आने की
वो खुशी के गीत गायेंगे
और आएगी बहार
किसी और देश में
और आएगी बहार
किसी और देश में
मैं प्रतीक्षा करूँगी
झरते मौसम का
मेहमान परिंदों का
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झरते मौसम का
मेहमान परिंदों का
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